अयोध्या: राम मंदिर में शुरू हुआ 10 दिवसीय विशेष प्रायश्चित और शुद्धिकरण अनुष्ठान, 70 वैदिक आचार्य संभाल रहे हैं कमान

गर्भगृह से लेकर परकोटे तक मंत्रोच्चार, 70 आचार्य कर रहे हैं शुद्धिकरण मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इस अनुष्ठान को बेहद भव्य और नियमों के अनुसार किया जा रहा है:

Jul 17, 2026 - 13:36
अयोध्या: राम मंदिर में शुरू हुआ 10 दिवसीय विशेष प्रायश्चित और शुद्धिकरण अनुष्ठान, 70 वैदिक आचार्य संभाल रहे हैं कमान

अयोध्या: अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की घटना के बाद, मंदिर परिसर की आध्यात्मिक गरिमा और मर्यादा की पुनर्स्थापना के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से मंदिर परिसर में 10 दिवसीय विशेष प्रायश्चित एवं शुद्धिकरण अनुष्ठान शुरू कर दिया गया है. इस अनुष्ठान का उद्देश्य भगवान से क्षमा-याचना करना और भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न होने का संकल्प लेना है.

चोरी की घटना सामने आने के बाद से ही राम भक्तों में गहरा दुख और आक्रोश था, जिसे देखते हुए ट्रस्ट ने धार्मिक परंपराओं और आस्था के अनुरूप यह बड़ा अनुष्ठान आयोजित करने का निर्णय लिया.

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गर्भगृह से लेकर परकोटे तक मंत्रोच्चार, 70 आचार्य कर रहे हैं शुद्धिकरण

मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इस अनुष्ठान को बेहद भव्य और नियमों के अनुसार किया जा रहा है:

  • 70 वैदिक आचार्यों की उपस्थिति: मंदिर के गर्भगृह, परकोटा और परिसर के अलग-अलग स्थानों पर देश के 70 प्रसिद्ध वैदिक आचार्य एक साथ अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं.

  • विशेष धार्मिक क्रियाएं: अनुष्ठान के तहत लगातार वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक, रामार्चन, विशेष हवन और कई अन्य गुप्त धार्मिक क्रियाएं की जा रही हैं.

  • क्या है धार्मिक मान्यता? शास्त्रों और हिंदू सनातन परंपराओं के अनुसार, यदि किसी देवस्थान या मंदिर में चोरी, अपवित्रता या कोई अन्य अनुचित कृत्य होता है, तो वहां दोष-परिमार्जन (दोष दूर करने) के लिए प्रायश्चित और शुद्धिकरण अनुष्ठान अनिवार्य माना जाता है.

"भूल का सबसे बड़ा प्रायश्चित यही कि दोबारा ऐसा न हो" — महंत गोविंद देव गिरि

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की है. उन्होंने कहा, "जिस पावन स्थान पर प्रभु श्रीराम साक्षात विराजमान हैं, वहां ऐसी घटना होना अत्यंत पीड़ादायक है."

  • निजी स्तर पर भी साधना: महंत गोविंद देव गिरि ने बताया कि वे व्यक्तिगत रूप से भी इस भूल के प्रायश्चित स्वरूप प्रतिदिन विशेष जप, स्तोत्र पाठ और धार्मिक साधना कर रहे हैं.

  • नई सुरक्षा व्यवस्था लागू: उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी भूल का सबसे बड़ा प्रायश्चित यही है कि उसे दोबारा न होने दिया जाए. इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने चढ़ावे की सुरक्षा और गर्भगृह की व्यवस्थाओं को और अधिक सख्त व डिजिटल रूप से सुदृढ़ कर दिया है, ताकि भविष्य में इसकी कोई गुंजाइश न रहे.

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है राम मंदिर

अयोध्या का राम मंदिर केवल एक ऐतिहासिक और भव्य संरचना नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर में बसे करोड़ों सनातनी भाई-बहनों और राम भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है. यही वजह है कि ट्रस्ट मंदिर की गरिमा, मर्यादा और आध्यात्मिक पवित्रता को बनाए रखने को अपनी सर्वोच्च जिम्मेदारी मानता है. इसी भावना और संकल्प के साथ इस 10 दिवसीय महा-अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है.

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Brajesh Mishra Purvanchal Ki Virasat (EDITOR)