सावधान! मानसून की ये आम गलतियां पहुंचा सकती हैं किडनी को नुकसान, जानें एक्सपर्ट्स की चेतावनी
डायबिटीज और हाई बीपी के मरीज: इन मरीजों की किडनी पहले से ही संवेदनशील स्थिति में होती है
नई दिल्ली: भीषण गर्मी के बाद मानसून की पहली फुहारें हर किसी को राहत देती हैं, लेकिन यह सुहाना मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है. अक्सर लोग बारिश के दिनों में सर्दी, खांसी, डेंगू या मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रति तो सचेत रहते हैं, लेकिन इस मौसम में किडनी (Kidneys) पर मंडराने वाले खतरे से अनजान रहते हैं.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान हमारी कुछ सामान्य आदतें और इस मौसम में फैलने वाले इन्फेक्शन्स सीधे तौर पर हमारी किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं. आइए जानते हैं कि बारिश का मौसम कब किडनी के लिए आफत बन जाता है और किन लोगों को इस दौरान सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.
1. मानसून में किडनी खराब होने की बड़ी वजहें
बारिश के दिनों में किडनी पर मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से दबाव पड़ता है:
अशुद्ध पानी और फूड पॉइजनिंग (Dehydration & Diarrhea)
मानसून में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं. दूषित पानी या बाहर का खुला खाना खाने से फूड पॉइजनिंग, दस्त (Diarrhea) और उल्टी की समस्या आम हो जाती है.
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शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का भारी मात्रा में बाहर निकलना एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) का कारण बन सकता है.
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जब शरीर में पानी की अत्यधिक कमी (Severe Dehydration) होती है, तो किडनी तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता, जिससे किडनी अचानक काम करना बंद कर सकती है.
कम पानी पीने की आदत
गर्मियों की तुलना में मानसून में प्यास कम लगती है. ऐसे में लोग पानी पीना बहुत कम कर देते हैं. शरीर में पानी की कमी के कारण यूरिन कंसंट्रेटेड (गाढ़ा) हो जाता है, जिससे:
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किडनी स्टोन (पथरी) बनने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
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टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) शरीर से बाहर नहीं निकल पाते और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) की आशंका बढ़ जाती है, जो बढ़कर किडनी इन्फेक्शन का रूप ले सकता है.
मॉनसून जनित बीमारियां (डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस)
बारिश के मौसम में फैलने वाली बीमारियां किडनी के लिए साइलेंट किलर साबित हो सकती हैं:
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डेंगू और मलेरिया: इन बीमारियों में प्लेटलेट्स और ब्लड प्रेशर तेजी से गिरता है. मल्टी-ऑर्गन फेलियर की स्थिति में सबसे पहला असर किडनी पर पड़ता है.
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लेप्टोस्पायरोसिस (चूहे/जानवरों के पेशाब से फैलने वाला इन्फेक्शन): बाढ़ या जमा हुए गंदे पानी में चलने से यह बैक्टीरिया घाव या त्वचा के जरिए शरीर में प्रवेश करता है. यह सीधे किडनी और लिवर को टारगेट करता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'वेल्स सिंड्रोम' कहा जाता है.
2. इन लोगों को रहना होगा 'सुपर अलर्ट'
वैसे तो यह मौसम हर किसी के लिए सावधानी बरतने का है, लेकिन निम्नलिखित केटेगरी के लोगों को विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए:
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डायबिटीज और हाई बीपी के मरीज: इन मरीजों की किडनी पहले से ही संवेदनशील स्थिति में होती है. शुगर या ब्लड प्रेशर में जरा सा भी उतार-चढ़ाव सीधे किडनी को प्रभावित करता है.
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क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीज: जो लोग पहले से ही किडनी की किसी बीमारी से जूझ रहे हैं या डायलिसिस पर हैं, उन्हें खान-पान को लेकर बेहद सख्त रहना होगा.
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बुजुर्ग और बच्चे: इनकी इम्युनिटी कमजोर होती है, जिससे इन्हें डिहाइड्रेशन या इन्फेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है.
3. किडनी को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
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उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं: प्यास न लगने पर भी दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं ताकि किडनी सुचारू रूप से काम करती रहे.
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बाहर के खाने और गंदे पानी से बचें: सड़क किनारे मिलने वाले कटे हुए फल, गोलगप्पे या खुला खाना खाने से पूरी तरह परहेज करें. बाढ़ या जलजमाव वाले पानी में नंगे पैर जाने से बचें.
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दवाइयों का खुद से सेवन न करें (No Self-Medication): सिरदर्द या बदन दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के 'पेनकिलर्स' (Painkillers) खाने की गलती बिल्कुल न करें. पेनकिलर्स का अत्यधिक सेवन मानसून में किडनी फेलियर के मामलों को तेजी से बढ़ाता है.
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लक्षणों को न करें नजरअंदाज: यदि यूरिन का रंग गहरा पीला या लाल हो, पेशाब में जलन हो, पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द हो, या पैरों व आंखों के नीचे सूजन दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
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