हेल्थ अलर्ट: क्या आप भी बिना सोचे-समझे तोड़ते हैं दवा की टेबलेट? जान लें ये जरूरी नियम

क्या आपने कभी गौर किया है कि बाजार में मिलने वाली कई दवाइयों की टेबलेट्स के बीच में एक पतली लाइन बनी होती है?

Jul 17, 2026 - 20:01
हेल्थ अलर्ट: क्या आप भी बिना सोचे-समझे तोड़ते हैं दवा की टेबलेट? जान लें ये जरूरी नियम

कुशीनगर/डेस्क। अक्सर हम बीमार होने पर डॉक्टर की दी हुई दवाइयों का सेवन करते हैं। क्या आपने कभी गौर किया है कि बाजार में मिलने वाली कई दवाइयों की टेबलेट्स के बीच में एक पतली लाइन बनी होती है? ज्यादातर लोग इसे सिर्फ डिजाइन समझते हैं, लेकिन इसके पीछे एक बहुत ही महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण है।

क्यों होती है यह लाइन (Score Line)?

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विशेषज्ञों के अनुसार, इसे 'स्कोर्स' (Score) या 'डिवाइडिंग लाइन' कहते हैं। इसके मुख्य तीन कारण होते हैं:

खुराक का प्रबंधन: कई बार डॉक्टर दवा की आधी खुराक लेने की सलाह देते हैं। इस लाइन की मदद से मरीज दवा को आसानी से बराबर हिस्सों में तोड़ सकते हैं।

निगलने में आसानी: बड़ी टेबलेट्स को निगलने में बुजुर्गों या बच्चों को परेशानी हो सकती है। इसे बीच से तोड़कर लेना आसान होता है।

निर्माण की तकनीक: यह लाइन दवा को मशीन से कंप्रेस करते समय उसके आकार को बनाए रखने में भी मदद करती है।

सावधान! ये गलतियाँ पड़ सकती हैं भारी

चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि हर दवा को तोड़ना सुरक्षित नहीं होता। अगर आप अपनी मर्जी से किसी भी दवा को तोड़कर खाते हैं, तो यह खतरनाक हो सकता है।

SR या XR दवाइयों से रहें दूर: जिन दवाइयों पर SR (Sustained Release), XR (Extended Release) या 'एंटरिक कोटेड' लिखा होता है, उन्हें कभी नहीं तोड़ना चाहिए। ये दवाइयाँ शरीर में धीरे-धीरे घुलने के लिए बनी होती हैं। इन्हें तोड़ने पर दवा का पूरा असर एक साथ शरीर में चला जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

डॉक्टर की सलाह लें: केवल उन्हीं टेबलेट्स को तोड़ें जिन पर यह स्कोर्स लाइन स्पष्ट बनी हो। किसी भी दवा को लेने से पहले फार्मासिस्ट या डॉक्टर से पूछें कि क्या उसे तोड़कर खाना सुरक्षित है।

विशेष सुझाव: दवा को हमेशा साफ हाथों से तोड़ें। यदि टेबलेट सख्त है, तो बाजार में उपलब्ध 'पिल कटर' (Pill Cutter) का ही उपयोग करें ताकि खुराक की मात्रा सटीक बनी रहे।

स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल के साथ बने रहें।

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Brajesh Mishra Purvanchal Ki Virasat (EDITOR)