बांग्लादेश में जमात-आवामी लीग को एक साथ निपटाने की तैयारी, क्या है तारिक रहमान सरकार का प्लान
बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी और अवामी लीग, दोनों पर एक साथ प्रतिबंध लगाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए सरकार ने पुराने मामलों को फिर से खोलने का फैसला किया है। गृह मंत्री सलाहुद्दीन चौधरी ने यह जानकारी दी।
बांग्लादेश सरकार को कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी और शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने का रास्ता मिल गया है। गुरुवार (9 जुलाई) को सरकार ने 1971 की घटनाओं से जुड़ी नई कानूनी कार्यवाही शुरू करने का फैसला किया। हालांकि तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि इस फैसले का निशाना अवामी लीग है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जमात-ए-इस्लामी भी मुख्य निशाने पर है। असल में, तारिक रहमान सरकार का मकसद बांग्लादेश की दोनों प्रमुख पार्टियों से एक साथ निपटना है।
हाल ही में, बीएनपी के महासचिव और सरकारी मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बीएनपी पर संभावित प्रतिबंध का संकेत दिया था। इस बीच, गृह मंत्री सलाहुद्दीन चौधरी ने कहा, "हम 1971 की फाइलें फिर से खोलेंगे। हम इतिहास के उस दौर की सभी प्रमुख घटनाओं की जांच करेंगे।" अवामी लीग पर प्रतिबंध इन्हीं नतीजों पर आधारित होगा।
जमात निशाने पर क्यों है?
1. बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी को पाकिस्तान-समर्थक पार्टी के तौर पर देखा जाता है। 1971 में जमात के नेताओं ने बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था। शेख हसीना के शासनकाल में भी इस पार्टी पर प्रतिबंध लगाया गया था।
2. जमात का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे बीएनपी के लिए खतरा पैदा हो गया है। जमात के नेता बीएनपी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। जमात के नेता खुद को राष्ट्रवादी के तौर पर पेश करके अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
3. बांग्लादेश की राजनीति में विपक्ष को खत्म करने का इतिहास रहा है। अवामी लीग के कार्यकाल के दौरान बीएनपी काफी कमजोर हो गई थी। फिलहाल, जमात मुख्य विपक्षी पार्टी है।
सरकार पर लगातार हमले
जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान लगातार तारिक रहमान सरकार की आलोचना करते रहे हैं। गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए शफीकुर ने कहा कि उनकी पार्टी को एक साजिश के तहत हराया गया। यूनुस की सरकार इस साजिश में शामिल थी। उन्होंने कहा, "हम अभी सत्ता में होते, लेकिन हमें विपक्ष में धकेल दिया गया।" शफीकुर अक्सर अपने भाषणों में तारिक रहमान को "शाहज़ादा" (प्रिंस) कहकर बुलाते हैं। गौरतलब है कि तारिक की माँ, खालिदा ज़िया, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं और उनके पिता, ज़ियाउर रहमान, राष्ट्रपति थे; राजनीति उन्हें विरासत में मिली है।
अवामी लीग भी निशाने पर
अवामी लीग 2008 से 2024 तक बांग्लादेश की सत्ता में रही। इस दौरान BNP को हाशिए पर धकेल दिया गया था। अब, तारिक रहमान की पार्टी भी बांग्लादेश में ज़्यादा से ज़्यादा समय तक सत्ता में बने रहने के लिए वही रणनीति अपनाना चाहती है।
हाल ही में, शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की योजना की घोषणा की। अगर वह लौटती हैं और उन्हें वहाँ राजनीतिक स्वीकार्यता मिलती है, तो ढाका में तारिक की सरकार की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि देश में शेख हसीना की स्थिति अभी भी मज़बूत है।
इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश में हुए एक सर्वे से पता चला कि 24 प्रतिशत लोगों ने शेख हसीना में दिलचस्पी दिखाई।
